सम्पूर्ण श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित (Shree Hanuman Chalisa with meaning)

सम्पूर्ण श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित 

सम्पूर्ण  हनुमान चालीसा अर्थ सहितश्री हनुमान चालीसा तुलसीदास जी की अवधी में लिखी एक काव्यात्मक कृति है जिसमे श्री हनुमान जी के गुण,कर्म,प्रभु तथा प्रभु भक्ति का उल्लेख किया गया है . हनुमान जी के ध्यान के लिए कई कृतिया है परन्तु श्री हनुमान चालीसा उन सब में से अत्यधिक लोकप्रिय है क्योकि इसकी भाषा सरल होने के कारन यह जन सुलभ कृति है . श्री हनुमान चालीसा को चालीसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें ४० दोहे होते है ( प्रथम के दो एवं अंतिम के एक दोहे को छोड़कर).श्री हनुमान चालीसा कई मायनो में गहन एवं रहस्यों से भरपूर है. श्री हनुमान चालीसा के एक दोहे "युग सहस्त्र योजन पर भानु" में पृथ्वी से सूर्य तक की दूरी लिखी गयी है जो हमारी प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं गणित का एक नमूना बताती है. श्री हनुमान चालीसा के एक अन्य दोहे "अष्ट सिद्धि एवं नव निधि के दाता अस वर दिन जानकी माता " इसमें आठ प्रकार की सिद्धि एवं नौ प्रकार की निधि(धन) का वर्णन मिलता है. श्री हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा हनुमान जी के बाल्यकाल से लेकर रावन के वध में प्रभु श्री राम जी की सहायता तथा प्रभु श्री राम के पुनः अयोध्या आगमन तक के मध्य श्री हनुमान जी द्वारा किये गये कार्यो को वर्णित करती है. हनुमान चालीसा की आखरी दोहों में से एक पंक्ति "जो शत बार पाठ कर कोई छुटहि बंदी महासुख होई" में कहा गया है की जो भी मनुष्य श्री हनुमान चालीसा को प्रत्येक दिन सौ बार,सौ दीन तक पाठ करता है तो वह संसार रूपी बंधन से मुक्त हो जाता है. कई पाठको का जिवंत अनुभव है की श्री हनुमान चालीसा के नियमित पाठ  के पश्चात उनमे एक अलग प्रकार की ऊर्जा का संचार हुआ है व श्री हनुमान चालीसा के पाठ के बाद अधिक उत्साह एवं किसी कार्य में केन्द्रित रूप से सलंग्न हुए है. श्री हनुमान चालीसा को कई व्यक्ति चमत्कारी मानते है . कई महानुभावो द्वारा यह भी कहा जाता है की केवल किसी काव्य का ऊच्चारण करने से क्या होगा तो हमारा उन महानुभाव से यही कहना है की आप केवल इसे प्रतिदिन एक महिना पढ़िए तथा उच्चारण करिए आप स्वयं ही इसका प्रभाव महसूस कर पाएँगे. श्री हनुमान चालीसा का श्रध्दा के साथ उच्चारण करे एवं हनुमान जी का सानिध्य प्राप्त करे. 
(हिंदी के साहित्यकारों के मतानुसार श्री हनुमान चालीसा रामचरितमानस के लेखक तुलसीदास की नही प्रत्युत किसी अन्य तुलसीदास की कृति है)

रावन रचित शिव तांडव स्त्रोत अर्थ सहित पढ़े : रावन रचित श्री शिव तांडव स्त्रोतम 

सम्पूर्ण श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित 

दो.  श्री गुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारी , बरनउ रघुवर विमल जासु जो दायकु फल चारी ||
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरो पवनकुमार ,बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरउ कलेश विकार || 

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
(हिंदी अर्थ- श्री हनुमान जी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों, स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल[ लोक में आपकी कीर्ति है।)
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥
(हिंदी अर्थ- हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नहीं है।)
महावीर विक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
(हिंदी अर्थ- हे महावीर बजरंग बली!आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालों के साथी, सहायक है।)
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥
(हिंदी अर्थ- आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।)
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥
हिंदी अर्थ- आपके हाथ में बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।
शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥
हिंदी अर्थ- शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है।
विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥
हिंदी अर्थ- आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम के काज करने के लिए आतुर रहते है।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया॥८॥
हिंदी अर्थ- आप श्री राम चरित्र सुनने में  रस लेते है। श्री राम, सीता और लक्ष्मन आपके हृदय में बसे रहते है।
सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥
हिंदी अर्थ- आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके लंका को जलाया।
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भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सँवारे॥१०॥
हिंदी अर्थ- आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उद्देश्यों को सफल कराया।
लाय संजीवन लखन जियाए
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥११॥
हिंदी अर्थ- आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥१२॥
हिंदी अर्थ- श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।
सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥
हिंदी अर्थ- श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥
हिंदी अर्थ- श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी , शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥१५॥
हिंदी अर्थ- यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥
हिंदी अर्थ- आपने सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने।
तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥
हिंदी अर्थ- आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥
हिंदी अर्थ- जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है कि उस पर पहुंचने के लिए हजार युग लगे। हजार युग योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥१९॥
हिंदी अर्थ- आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुंह में रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥
हिंदी अर्थ- संसार में जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।
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राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥
हिंदी अर्थ- श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप रखवाले है, जिसमें आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नहीं मिलता
अर्थात् आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥
हिंदी अर्थ- जो भी आपकी शरण में आते है, उस सभी को आनन्द प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता।
आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥
हिंदी अर्थ- आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते है।
भूत पिशाच निकट नहिं आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥
हिंदी अर्थ- जहां महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहां भूत, पिशाच पास भी नहीं फटक सकते।
नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥
हिंदी अर्थ- वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।
संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥२६॥
हिंदी अर्थ- हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है।
सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा॥२७॥
हिंदी अर्थ- तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥
हिंदी अर्थ- जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करें तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती।
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥
हिंदी अर्थ- चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग में आपका यश फैला हुआ है, जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।
साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥
हिंदी अर्थ- हे श्री राम के दुलारे! आप सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।
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अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
हिंदी अर्थ- आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते।
है राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥
हिंदी अर्थ- आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण में रहते है, जिससे आपके पास (असाध्य रोगों के नाश के लिए) राम नाम औषधि है।
तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥
हिंदी अर्थ- आपका भजन करने से श्री राम जी प्राप्त होते है और जन्म जन्मांतर के दुख दूर होते है।
अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥
हिंदी अर्थ- अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलाएंगे।
और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥
हिंदी अर्थ- हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नहीं रहती।
संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥
हिंदी अर्थ- हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।
जै जै जै हनुमान गोसाई
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥
हिंदी अर्थ- हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझ पर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहिं बंदि महा सुख होई॥३८॥
हिंदी अर्थ- जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जाएगा और उसे परमानन्द मिलेगा।
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जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥३९॥
हिंदी अर्थ- भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है, कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥
हिंदी अर्थ- हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है। इसलिए आप उसके हृदय में निवास कीजिए।

(दोहा)
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
हिंदी अर्थ- हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनंद मंगलों के स्वरूप हैं। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।

सिया बर रामचंद्र जी की जय

Shree Hanuman Chalisa in English with meaning in English

॥ Doha ॥
Shree Guru Charan Saroj Raj,Nij manu Mukuru Sudhaari।
Barnau Raghubar Bimal Jasu,Jo Daayaku Phal Chaari॥
(With the residue of Guru's Lotus feet, I clean the reflection of my mind and afterward portray the holy greatness of
Sri Ram Chandra, The Supereme among the Raghu administration. The supplier of the four fulfillments of life. )

Buddhiheen Tanu Jaanike,Sumirau Pavan-Kumar।
Bal Buddhi Bidya Dehu Mohi,Harahu Kales Bikaar॥
(Realizing that myself will generally be ignorent, I encourage you, O Hanuman, The child of Pavan! Ruler! generously Bestowo on me quality, astuteness and information, expelling every one of my agonies and imperfections. )

॥ Chaupai ॥
Jai Hanuman Gyaan Gun Sagar।
Jai Kapis Teehun Lok Ujagar ।१
(Triumph of Thee, O Hanuman, Ocean of intelligence and righteousness, triumph to the Lord of monkeys who is notable in all the three universes )

Ram Doot Atulit Bal Dhaama।
Anjani-Putra Pavansut Nama।२
(You, the Divine emissary of Ram and vault of endless quality, are otherwise called Anjaniputra and known as the child of the breeze - Pavanputra. )

Mahabir Bikram Bajrangi।
Kumati Nivaar Sumati Ke Sangi।३
(Goodness Hanumanji! You are valiant and daring, with a body like helping. You are the dispeller of murkiness of abhorrence
musings and partner of good sense and knowledge. )

Kanchan Baran Biraaj Subesa।
Kaanan Kundal Kunchit Kesa।४
(Shri Hanumanji's constitution is brilliant hued. His dress is quite, wearing Kundals' ear-rings and his hairs are long and wavy. )

Haath Bajra Aau Dhwaja Biraaje।
Kaandhe Moonj Janeu Saaje।५
(Shri Hanumanji is holding in one hand a lighting jolt and in the other a standard with consecrated string over his shoulder. )

Sankar Suvan Kesarinandan।
Tej Prataap Maha Jag Bandan।६
(Goodness Hanumanji! You are the spread of 'SHIVA' and you enchant Shri Keshri. Being ever brilliant, you what'smore, hold immense influence over the universe. The whole world appeases. You are cute of all. )

Bidyabaan Guni Ati Chaatur।
Ram Kaaj Karibe Ko Aatur।७
(Gracious! Shri Hanumanji! You are the storehouse learning, upright, extremely savvy and profoundly quick to take every necessary step of Shri Ram, )

Prabhu Charitra Sunibe Ko Rasiya।
Ram Lakhan Sita Man Basiya।८
(You are strongly eager for tuning in to the portrayal of Lord Ram's biography and revel on its pleasure. You ever stay in the hearts of Shri Ram-Sita and Shri Lakshman.)

Sukshma Roop Dhari Siyahin Dikhawa।
Bikat Roop Dhari Lanka Jarawa।९
(You showed up beofre Sita in a humble structure and addressed her, while you expected a great structure and struck dread by setting Lanka ablaze. )

Bheem Roop Dhari Asur Sanhaare।
Ramchandra Ke Kaaj Sanwaare।१०
(He, with his awful structure, executed evil spirits in Lanka and played out all demonstrations of Shri Ram.)

Laaye Sajivan Lakhan Jiyaaye।
Shri Raghubeer Harashi Ur Laaye।११
(When Hanumanji made Lakshman alive in the wake of bringing 'Sanjivni herb' Shri Ram took him in his profound grasp, his heart brimming with delight. )

Raghupati Keenhi Bahut Badai।
Tum Mum Priy Bharat Hi Sam Bhai।१२
(Shri Ram vigorously lauded Hanumanji's greatness and commented, "you are as dear to me as my very own sibling Bharat" )

Sahas Badan Tumhro Jas Gaavein।
As Kahi Shripati Kanth Lagavein।१३
(Shri Ram grasped Hanumanji saying: "Let the thousand - tongued sheshnaag sing your wonders" )

Sankadik Bramhadi Munisa।
Narad Sarad Sahit Ahisa।१४
(Sanak and the sages, holy people. Ruler Brahma,the incredible recluses Narad and Goddess Saraswati along with Sheshnag the infinite snake, neglect to sing the wonders of Hanumanji precisely)

Jam Kuber Digpaal Jahan Te।
Kabi Kobid Kahi Sake Kahaan Te।१५
(What to discuss inhabitants of the earth like artists and researchers ones and so on even Gods like Yamraj, Kuber, and Digpal neglect to portray Hanman's enormity in all. )

Tum Upkaar Sugreevhin Kinha।
Ram Milaaye Raajpad Dinha।१६
(Hanumanji! You rendered an extraordinary help for Sugriva, It were you who joined together him with SHRI RAM and introduced him on the Royal Throne. )

Tumhro Mantra Vibhishan Maana।
Lankeswar Bhaye Sab Jag Jana।१७
(By paying attention to your recommendation. Vibhushan became Lord of Lanka, which is known everywhere throughout the universe.)

Yug Sahastra Jojan Par Bhaanu।
Lilyo Taahi Madhur Phal Jaanu।१८
(Hanumanji swallowed, the SUN at separation of sixteen thousand miles believing it to be a sweet natural product.)

Prabhu Mudrika Meli Mukh Maahi।
Jaldhi Laanghi Gaye Achraj Naahi।१९
(Conveying the Lord's ring in his mouth, he went over the sea. There is no big surprise in that.)

Durgam Kaaj Jagat Ke Jete।
Sugam Anugraha Tumhre Tete।२०
(Goodness Hanumanji! all the troublesome assignments on the planet are rendered least demanding by your effortlessness.)

Ram Duare Tum Rakhwaare।
Hovat Na Aagya Binu Paisare।२१
(Goodness Hanumanji! You are the sentinel at the entryway of Ram's leniency manor or His celestial dwelling place.Nobody may enter without your consent. )

Sab Sukh Lahai Tumhari Sarna।
Tum Rakhshaak Kahu Ko Darna।२२
(By your elegance one can appreciate all bliss and one need not have any dread under your insurance.)

Aapan Tej Samharo Aapai।
Teeno Lok Haank Te Kaanpe।२३
(At the point when you thunder all the three universes tremble and no one but you can control your strength. )

Bhoot Pisaach Nikat Nahi Aave।
Mahabir Jab Naam Sunave।२४
(Extraordinary Brave on. Hanumanji's name keeps every one of the Ghosts, Demons and wrongs spirits from his fans).

Naasai Rog Harai Sab Peera।
Japat Nirantar Hanumat Beera।२५
(On recounting Hanumanji's blessed name consistently every one of the diseases die the whole torment vanishes. )

Sankat Se Hanuman Chhoodave।
Man Krama Bachan Dhyaan Jo Laave।२६
(The individuals who recollect Hanumanji in thought, word and deed are very much prepared for their chances throughout everyday life.)

Sab Par Raam Tapasvi Raja।
Tin Ke Kaaj Sakal Tum Saaja।२७
(Goodness Hanumanji! You are the overseer of even Lord Rama, who has been hailed as
the Supreme Lord and the Monarch of each one of those gave in retributions. )

Aur Manorath Jo Koi Laave।
Soi Amit Jivan Phal Paave।२८
(Goodness Hanumanji! You satisfy the wants of the individuals who come to you and offer the unceasing nectar the most noteworthy product of life. )

Chaaro Jug Partaap Tumhara।
Hai Parsiddh Jagat Ujiyara।२९
(Goodness Hanumanji! You superb wonder is acclaimed far and wide all through the
four ages and your popularity is radianlty noticed everywhere throughout the universe. )

Saadhu Sant Ke Tum Rakhwaare।
Asur Nikandan Ram Dulaare।३०
(Goodness Hanumanji! You are the friend in need and the gatekeeper holy messenger of holy people and sages furthermore, pulverize every one of the Demons, you are the seraphic sweetheart of Shri Ram. )
Asht Siddhi Nau Nidhi Ke Daata।
As var Deen Jaanki Maata।३१
(Hanumanji has been honored with mother Janaki to give to any one any YOGIC intensity of eight Sidhis and Nava Nidhis according to decision. )

Ram Rasayan Tumhre Paasa।
Sada Raho Raghupati Ke Daasa।३२
(Goodness Hanumanji! You hold the pith of dedication to RAM, continually remaining His Servant.)

Tumhre Bhajan Ram Ko Paave।
Janam Janam Ke Dukh Bisraave।३३
(Goodness Hanumanji! through commitment to you, one comes to RAM and turns out to be liberated from enduring of a few lives.)

Antakaal Raghubar Pur Jaayee।
Jahan Janam Hari-Bhakt Kahayee।३४
(After death he enters the unceasing habitation Sri Ram and stays a fan of him, at whatever point, taking new birth on earth.)

Aur Devta Chitt Na Dharayi।
Hanumat Sei Sarb Sukh Karayi।३५
(You need not hold some other diving being at the top of the priority list. Hanumanji alone will give all joy.)

Sankat Kate Mite Sab Peera।
Jo Sumirai Hanumat Balbira।३६
(Gracious Powerful Hanumanji! You end the sufferings and expel all the torment from the individuals who recollect you)

Jai Jai Jai Hanuman Gosaai।
Kripa Karahun Gurudev Ki Naai।३७
(Hail-Hail-Hail-Lord Hanumanji! I importune you Honor to favor me in the
limit of my preeminent 'Master' (instructor)

Jo Sat Baar Paath Kar Koi।
Chhootahin Bandi Maha sukh Hoyi।३८
(One who discusses this Hanuman Chalisa one hundred times every day for one hundred days turns out to be free from the servitude of life and demise and appreciates the most noteworthy rapture finally.)

Jo Yeh Padhe Hanuman Chalisa।
Hoye Siddhi Saakhi Gaurisa।३९
(As Lord Shankar witnesses, every one of the individuals who present Hanuman Chalisa normally make certain to be benecdicted)

Tulsidas Sada Harichera।
Kije Naath Hridaya Mahn Dera।४०
(Tulsidas consistently the worker of Lord asks. "Gracious my Lord! You cherish inside my heart.! )

॥ Doha ॥
Pavantanaya Saankat Haran,Mangal Moorti Roop।
Ram Lakhan Sita Sahit,Hridaya Basahu Soor Bhoop॥
(O Shri Hanuman, The Son of Pavan, Savior The Embodiment offavors, live in my heart together with Shri Ram, Laxman and Sita )
मित्रो यह श्री हनुमान चालीसा प्रतिदिन पढने से श्री हनुमान जी का असीम स्नेह प्राप्त होता है जैसा की श्री हनुमान चालीसा की चौपाई "जो शत बार पाठ कर कोई छुटहि बंदी महासुख होई " में विदित है की जो कोई भी श्री हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करलेता है वह समस्त बन्धनों से मुक्त हो जाता है व सद्गति प्राप्त करता है इसलिए मित्रो प्रतिदिन इस श्री हनुमान चालीसा का पाठ करे व श्री हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त करे |जय श्री राम .
रावन रचित शिव तांडव स्त्रोत अर्थ सहित पढ़े : रावन रचित श्री शिव तांडव स्त्रोतम 

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